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Poetry

Words beyond the courtroom.

अदालत के बाहर के शब्द

Justice speaks through law. Humanity speaks through poetry.

01

देखी नहीं जाती

ग़ज़ल

इतनी सारी बेईमानी, देखी नहीं जाती

तेरी आंखों की परेशानी, देखी नहीं जाती

गुजार दी हैं मैंने मुद्दतें अंधेरों में यारों

अब उजालों की निशानी, देखी नहीं जाती

कुछ भी, कैसा भी देखा जा सकता, मगर मुझसे

तेरी झुकी ये पेशानी, देखी नहीं जाती

दिल में आज कोई और है, कल कोई और

इश्क में इतनी भी मनमानी, देखी नहीं जाती

पड़ोसी भूखा है और तुम्हें नींद आ जाती

आदमियत की ये अर्ज़ानी, देखी नहीं जाती

वो चाहती है पीना सारे दरिया का पानी

इन नदियों की ये नादानी, देखी नहीं जाती

पेशानी = सिर, माथाअर्ज़ानी = सस्तापन
02

बारी होगी

ग़ज़ल

पहले उससे यारी होगी

पीछे से गद्दारी होगी

धोखा दे खुश होने वाले

अबकी तेरी बारी होगी

संभल के जाना महफिल में

उसकी भी तैयारी होगी

थोड़े गफलत में रहने से

जीती बाजी हारी होगी

ऐसे कैसे मिलेगी मंजिल

कुछ कुछ तो दुश्वारी होगी

खुश मत हो कर उल्टे काम

पीछे से लाचारी होगी

03

पकड़ा दिया

ग़ज़ल

झमेला ये अच्छा खासा पकड़ा दिया

खेल ये इश्क का कैसा पकड़ा दिया

हुए होंगे मालामाल कोई इश्क में

हमें तो इश्क ने कासा पकड़ा दिया

जगा कर उसने अच्छी खासी प्यास मेरी

एक दरिया मुझको प्यासा पकड़ा दिया

मुझे तो रहना था अजनबियों के साथ

मगर उसने तो शनासा पकड़ा दिया

मैंने तो मांगी थी इज्जत की रोटी उससे

मगर उसने हर बार पैसा पकड़ा दिया

कासा = भिक्षा पात्रशनासा = परिचित
04

हैसियत

ग़ज़ल

मेरी तब तक हैसियत है

जब तक मेरी जरूरत है

कोई माने या ना माने

यहीं लेकिन असलियत है

पूरी दुनिया में ही यारों

झगड़े की जड़ मिल्कियत है

आज मेरा इंतजार है

कल बता किसको फुर्सत है

आज मिले और कल बिछड़े

यारों ये कैसी उल्फत है

05

शब्द और न्याय

मुक्तक

सच्चाई की राह में

शब्द ही शस्त्र हैं,

न्याय की पुकार में

मौन ही पस्त है।

06

दीपक

मुक्तक

एक छोटा-सा दीपक

अंधेरे को चुनौती देता है,

एक सच्चा वकील

अन्याय को।

07

माँ की दहलीज़

मुक्तक

जिस घर की दहलीज़ पर

माँ का आशीर्वाद हो,

वहाँ कानून की किताबें भी

थोड़ी कोमल हो जाती हैं।

08

अदालत

मुक्तक

अदालत के बाहर

कोई जीतता नहीं है,

कुछ हारते हैं ज़्यादा,

कुछ हारते हैं कम।

"जहाँ कानून की भाषा थक जाए, वहाँ कविता बोलती है।"

— Adv. Kamal Shrimali